खरगोन (मध्यप्रदेश): मध्यप्रदेश के खरगोन जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां रिजर्व इंस्पेक्टर (RI) सौरभ कुशवाह पर आरोप है कि उन्होंने अपने पालतू कुत्ते के गुम हो जाने पर एक पुलिस कांस्टेबल को बेल्ट से बेरहमी से पीटा। मामला सामने आने के बाद एसपी धर्मराज मीना ने इंस्पेक्टर को तत्काल निलंबित कर दिया। वहीं, FIR दर्ज कराने की मांग को लेकर आदिवासी संगठन जयस और पीड़ित परिवार ने धरना और चक्काजाम शुरू कर दिया है।
कैसे हुआ विवाद?
कांस्टेबल राहुल चौहान का आरोप है कि इंस्पेक्टर सौरभ कुशवाह के पास दो पालतू कुत्ते हैं। इनमें से एक छोटा कुत्ता अचानक गुम हो गया। कुत्ते की तलाश न मिलने पर इंस्पेक्टर ने देर रात 1 बजे कांस्टेबल को अपने घर बुलाया और कमरे में ले जाकर बेल्ट से बुरी तरह पीटा।
पीड़ित कांस्टेबल के मुताबिक, इस दौरान न केवल मारपीट की गई बल्कि गाली-गलौज भी किया गया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद मामला तूल पकड़ गया।

FIR की मांग पर अड़े संगठन
कांस्टेबल राहुल चौहान और उनकी पत्नी जयश्री ने अजाक थाने में शिकायत दर्ज कराई और आरोपी इंस्पेक्टर के खिलाफ FIR की मांग की। लेकिन 24 घंटे बीतने के बावजूद पुलिस प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं होने पर स्थानीय आदिवासी संगठन जयस ने मोर्चा खोल दिया।
जयस कार्यकर्ताओं ने खंडवा-बड़ोदरा नेशनल हाइवे पर चक्काजाम कर दिया और थाने का घेराव करते हुए नारेबाजी की। इस दौरान ट्रैफिक कई घंटे बाधित रहा।
पुलिस बल की तैनाती और तनावपूर्ण स्थिति
सूचना मिलते ही एसडीओपी रोहित लखारे और थाना प्रभारी बीएल मंडलोई भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की, लेकिन संगठन FIR दर्ज किए जाने तक आंदोलन जारी रखने की मांग पर अड़े रहे।
स्थिति को बिगड़ते देख एसपी धर्मराज मीना ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी इंस्पेक्टर को निलंबित कर दिया।
जांच की जिम्मेदारी और आगे की कार्रवाई
खरगोन एसपी धर्मराज मीना ने मामले की जांच की जिम्मेदारी बुरहानपुर के एएसपी अंतरसिंह कनेश को सौंपी है। साथ ही, डीआईजी सिद्धार्थ बहुगुणा भी इस मामले की निगरानी कर रहे हैं।
आदिवासी संगठनों ने चेतावनी दी है कि जब तक आरोपी इंस्पेक्टर के खिलाफ FIR दर्ज नहीं होती और उसे सख्त सजा नहीं मिलती, तब तक उनका धरना-प्रदर्शन जारी रहेगा।
सोशल मीडिया पर बढ़ा दबाव
घटना का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी लोग पुलिस प्रशासन की आलोचना कर रहे हैं। कई यूजर्स ने सवाल उठाए कि जब एक सिपाही को इंसाफ पाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, तो आम जनता का क्या होगा।
नतीजा क्या निकलेगा?
यह मामला अब प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है। एक ओर पुलिस विभाग की साख दांव पर है, तो दूसरी ओर आदिवासी संगठन FIR दर्ज कराने पर अड़े हुए हैं। देखना होगा कि जांच रिपोर्ट के बाद इस घटना में आगे क्या कार्रवाई होती है।
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